मेहनत से आत्मनिर्भरता तक: छह गायों से पुष्पा ने खड़ी की 3 लाख की डेयरी, बदली तकदीर
जसपुर। (लोक निर्णय)ऊधम सिंह नगर जिले के जसपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत निवारमंडी मेघावाला की पुष्पा, पत्नी हेमराज सिंह ने मेहनत, वित्तीय सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन के बूते पशुपालन को आत्मनिर्भरता के मजबूत साधन में बदल दिया है। कभी सीमित संसाधनों के बीच गाय पालन कर परिवार की आजीविका में सहयोग करने वाली पुष्पा आज छह गायों का डेयरी उद्यम संचालित कर रही हैं और इससे हर माह करीब 15 हजार से 18 हजार रुपये तक की बचत कर रही हैं।
पुष्पा बाला जी समूह से जुड़ी हैं और सागर महिला ग्राम संगठन की सदस्य हैं। उनका संबंधित सीएलएफ हिमान्या महिला स्वायत्त सहकारिता है। वर्ष 2025-26 में उनकी आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से IFAD-वित्तपोषित Gramotthan (REAP) परियोजना के तहत सर्वेक्षण किया गया। इसके बाद उन्हें Farm Based Enterprises के अंतर्गत डेयरी गतिविधि के लिए सहयोग दिया गया। उनकी डेयरी गतिविधि की शुरुआत 6 अगस्त 2025 को हुई।पुष्पा के डेयरी उद्यम में कुल 3 लाख रुपये का निवेश हुआ। इसमें 75 हजार रुपये उनका स्वयं का अंशदान, 75 हजार रुपये Gramotthan (REAP) परियोजना की सहायता और 1.50 लाख रुपये बैंक ऋण शामिल है। इस वित्तीय सहयोग से उन्होंने छह गायें खरीदीं और अपने पारंपरिक पशुपालन को व्यवस्थित डेयरी उद्यम का रूप दिया।परियोजना सहायता और बैंक ऋण ने जहां निवेश का आधार मजबूत किया, वहीं पशुपालन विभाग से मिले तकनीकी सहयोग ने उद्यम को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद की। पशुओं के पोषण के लिए बिनौला संबंधी मार्गदर्शन दिया गया और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए टीकाकरण कराया गया। इससे पुष्पा को पशुओं की बेहतर देखभाल, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन की जानकारी मिली।
आय के साथ बढ़ा आत्मविश्वासपरियोजना के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, डेयरी गतिविधि से अब तक 2.05 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है। इस दौरान करीब ₹95 हजार का व्यय हुआ और 1.50 लाख रुपये का लाभ दर्ज किया गया है। वर्तमान में पुष्पा प्रतिमाह लगभग 15 हजार से 18 हजार की बचत कर रही हैं, जो सालाना करीब 1.80 लाख से 2.16 लाख तक बैठती है।पुष्पा के लिए यह बदलाव केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है। उनकी नियमित बचत परिवार की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रही है। साथ ही, अपने उद्यम को स्वयं संचालित करने से उनके आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हुई है।“आज पशुपालन मेरे लिए केवल परिवार चलाने का साधन नहीं, बल्कि मेरी अपनी पहचान और आत्मनिर्भरता का आधार बन गया है।पुष्पा की कहानी बताती है कि ग्रामीण महिलाओं में उद्यमिता की क्षमता मौजूद है, जरूरत है तो उसे अवसर, वित्तीय संसाधन और सही मार्गदर्शन देने की। Gramotthan (REAP) परियोजना ने उनकी मौजूदा आजीविका गतिविधि को पहचानकर उसे उद्यम के रूप में विकसित करने का अवसर दिया। बैंक ऋण और परियोजना सहायता से निवेश मजबूत हुआ, जबकि विभागीय तकनीकी सहयोग ने डेयरी को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।निवारमंडी की पुष्पा ने साबित किया है कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत बड़े उद्योग से ही हो, यह जरूरी नहीं। गांव में छह गायों से शुरू किया गया एक छोटा प्रयास भी मेहनत और सही सहयोग के साथ मजबूत आय का आधार बन सकता है।





