प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है मां बाल सुंदरी मंदिर
काशीपुर।उत्तराखंड के काशीपुर क्षेत्र में स्थित मां बाल सुंदरी देवी का शक्तिपीठ आस्था, श्रद्धा और प्रमुख केंद्र है। यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी पौराणिक मान्यता भी अत्यंत प्राचीन और पवित्र मानी जाती है।मान्यता है कि जब माता सती ने यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए थे, तब भगवान शिव उन्हें लेकर तांडव करने लगे। उस समय भगवान विष्णु ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने सुदर्शन चक्र से माता के शरीर के टुकड़े किए। जहां जहां वे अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। काशीपुर में स्थित माँ बाल सुंदरी देवी का मंदिर भी इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है।यहां माता को बाल रूप में विराजमान माना जाता है, इसलिए इन्हें “बाल सुंदरी” कहा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में जो भी आता है, उसकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से संतान सुख, स्वास्थ्य, रोजगार और पारिवारिक सुख के लिए यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं।
मां बाल सुंदरी देवी का मंदिर प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ है, जहां का वातावरण भक्तों को शांति और ऊर्जा प्रदान करता है। सुबह-शाम होने वाली आरती और भजन पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना देते हैं।
हर वर्ष यहाँ भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जो विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि के समय लगता है। इस दौरान दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मेले में धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, झूले, दुकानें और स्थानीय हस्तशिल्प की झलक देखने को मिलती है।
यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है, जहां हर वर्ग और हर उम्र के लोग एक साथ मां के चरणों में शीश नवाते हैं। मां बाल सुंदरी देवी का यह शक्तिपीठ उत्तराखंड की धार्मिक विरासत का अमूल्य रत्न है, जो श्रद्धा, विश्वास और संस्कृति को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा रहा है।




