प्रकृति प्रेम व लोक संस्कृति का प्रतीक फूलदेई पर्व
फूलदेई: एक उत्सव जो उत्तराखंड की प्रकृति प्रेम व सांस्कृतिक लोक पर्व को जीवित रखने का प्रतीक है। उत्तराखंड का यह प्रसिद्ध लोक पर्व बच्चों के लिए एक बड़ा उत्सव है, जो चैत्र मास की संक्रांति पर मनाया जाता है। डॉक्टर गणेश उपाध्याय बताते हैं कि इस पर्व के माध्यम से बच्चे प्रकृति के करीब आते हैं और नववर्ष के स्वागत के लिए तैयार होते हैं। फूलदेई का महत्व न केवल प्रकृति प्रेम में है, बल्कि यह लोक संस्कृति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। बच्चे जंगल या खेतों से ताज़े फूल इकट्ठा करते हैं और घर-घर जाकर देहरी पर फूल चढ़ाते हैं, जिससे घर में सुख, समृद्धि और मंगलकामना आती है। प्योंली फूल की कथा इस पर्व को और भी विशेष बनाती है, जो वनकन्या प्योंली की कहानी बताती है, जो प्रकृति और जंगल के सभी जीवों की प्रिय थी। फूलदेई की परंपरा में बच्चे घर-घर जाकर फूल चढ़ाते हैं और लोकगीत गाते हैं, जिससे उन्हें चावल, गुड़ और पैसे भेंट के रूप में मिलते हैं। इस प्रकार, फूलदेई न केवल एक पर्व है, बल्कि एक ऐसा अवसर है हमारे उत्तराखंड के लोक पर्व सांस्कृतिक धरोहर एवं प्रकृति प्रेम को सजोये हुए हैं ।





