पहाड़ में रोजगार की मिसाल बना हयात सिंह
चंपावत।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत लोग आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहे है। जी हां,जनपद चम्पावत के देवीधुरा क्षेत्र के बैरख मेतणा गांव के निवासी हयात सिंह मेहरा एवं उनकी धर्मपत्नी विमला देवी आज चम्पावत जनपद में परिश्रम, नवाचार और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक पहचान बनकर उभरे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद पहाड़ में भी सतत आजीविका और समृद्धि संभव है।इस विश्वास को यह दंपती अपने सतत प्रयासों और नवोन्मेषी कार्यों से साकार कर रहा है।हयात सिंह पारंपरिक पंचक्की संचालन के साथ-साथ मछली पालन, जैविक खेती एवं बहु–आयामी कृषि गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलग्न हैं। उनके खेतों में शिमला मिर्च, बैंगन, लौकी, तुरई, करेला सहित विभिन्न पहाड़ी दालों की पूर्णतः जैविक खेती की जाती है। इसके अतिरिक्त वे मशरूम उत्पादन, शहद उत्पादन, मिर्च–नमक, दालें एवं अन्य जैविक उत्पाद भी तैयार कर रहे हैं।विशेष रूप से उनके द्वारा तैयार किए जा रहे अचार एवं मुरब्बे, जिनमें विशिष्ट मछली का अचार भी शामिल है, अपनी शुद्धता, पारंपरिक विधि और उत्कृष्ट स्वाद के कारण स्थानीय लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। सभी उत्पाद पूरी तरह स्वच्छ, प्राकृतिक एवं बिना किसी रसायन के पारंपरागत तरीकों से तैयार किए जाते हैं।हयात सिंह मेहरा ने देवीधुरा–हल्द्वानी मार्ग पर ‘मेरा गृह उद्योग’ नाम से एक स्व–संचालित दुकान की स्थापना भी की है।जहां उनके स्वयं के साथ-साथ स्थानीय क्लस्टर के ग्रामीणों द्वारा तैयार जैविक उत्पाद जैसे अचार, दालें, मसाले एवं अन्य खाद्य सामग्री—उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे न केवल उन्हें आत्मरोजगार प्राप्त हुआ है, बल्कि आसपास के ग्रामीणों को भी अपने उत्पादों के विपणन के लिए एक सशक्त और स्थायी मंच मिला है।
हाल के समय में भालू द्वारा फसलों को क्षति पहुँचने से कुछ गतिविधियां प्रभावित अवश्य हुई हैं। इसके बावजूद हयात सिंह दंपति का हौसला, नवाचार और संकल्प पूरी तरह अडिग बना हुआ है। गत वर्ष प्रारंभ किया गया मशरूम उत्पादन अत्यंत सफल सिद्ध हुआ है, जो उनकी प्रयोगधर्मी सोच और दूरदर्शी दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।




