पहले की सरकार के सिस्टम की कमजोरी से हो रही थी मिनरल की चोरी:अग्रवाल
रुद्रपुर।उत्तराखंड के प्रसिद्ध उद्योगपति समाजसेवी एवं कुमार ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के स्वामी शिवकुमार अग्रवाल ने आज कहा कि अपनी व्यापारिक लाइफ का 60 वर्षों यानी 1966 से आज तक का व्यावसायिक अनुभव है।
आजकल समाज में, उत्तराखंड की मिनरल पॉलिसी को लेकर जो आलोचना हो रही है, उसके संदर्भ में में यह कहना चाहता हूं कि उत्तराखंड में, हमारे 35 वर्षों के अनुभव में यह पहली बार है कि विगत डेढ़ साल में खनन से उत्तराखंड सरकार को चार गुना राजस्व प्राप्त हुआ है, जो 300 से बढ़कर 1200 करोड़ हो गया है। जिसका उपयोग विकास कार्यों में किया जाएगा।इससे पहले सरकार के विभागों /सिस्टम की कमजोरी से मिनरल की लीकेज और चोरी हो रही थी।जबकि स्टोन क्रशिंग इंडस्ट्री को कोई लाभ नहीं हो रहा था, क्योंकि उद्योगों को मुनाफा नहीं हो रहा था। अग्रवाल ने पत्रकारों को बताया कि उत्तराखंड में स्टोन क्रशिंग की करीब 400 इकाईयां हैं,जो राज्य का सबसे अधिक रोजगार देने वाला केवल एक मात्र ऐसा उद्योग है। जिससे लगभग सात लाख परिवार के लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है।
स्टोन क्रशिंग उद्योग उत्तराखंड का सबसे बड़ा उद्योग है, इससे रॉयल्टी, फारेस्ट ट्रांजिट, जीएसटी, आयकर तथा आरटीओ टैक्स के मद में सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 10000 करोड रुपये का राजस्व, सभी विभागों में जीएसटी (4500 करोड रुपये), आबकारी (2300 करोड रुपये), आरटीओ (1600 करोड रुपये) से ज्यादा 10,000 करोड मिल रहा है।
टेंडर प्रक्रिया को अपनाने के लिए माईनिंग विभाग ने हमें संपर्क किया और कहा कि टेंडर प्रक्रिया में भाग लें, लेकिन हमने स्पष्ट रूप से मना कर दिया। हमने कहा कि हम इस तरह की रॉयल्टी कलेक्शन प्रणाली से नहीं जुड़ सकते, क्योंकि यह एक बहुत कठिन कार्य है। कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी और खनन विभाग की टीम ने इस सेक्टर में बहुत बड़ा रिफार्म करके समाज, उद्योग, रियासत के हित में बहुत अच्छी पालिसी बनाई है। वर्तमान मिनरल पालिसी उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में भी लागू है। कहा कि उत्तराखण्ड स्टोन क्रेशर के स्वामियों ने टैक्नोलाजी में काफी रिसर्च और डेवलपमेन्ट करके कोरसैण्ड (धूला रेता) तथा एमसैण्ड (मैन्यूफैक्चरिंग सैण्ड) बनाने की तकनीकी विकसित की।उन्होंने कहा किउत्तराखंड सरकार को इस सेक्टर पर पूरा फोकस कर, भविष्य में भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए तथा उद्योग को पूर्ण सहयोग करना चाहिए।





