पंत विवि और अमेरिका की व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन के बीच हुआ समझौता
पंतनगर।(लोक निर्णय) गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर और अमेरिका स्थित व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन के बीच कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में नवाचार, क्षमता निर्माण, छात्रों के प्रशिक्षण तथा ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता ग्रामीण भारत में शोध एवं नवाचार को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने तथा तकनीक आधारित समाधानों को बड़े स्तर तक पहुंचाने की दिशा में सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेगा।
विश्वविद्यालय की ओर से निदेशक शोध डा. एसके वर्मा तथा व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. रतन अग्रवाल ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। संयुक्त निदेशक शोध डा. पी.के. सिंह ने गवाह के रूप में सहभागिता की। विश्वविद्यालय के कुलपति डा. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय के शोध, प्रसार एवं छात्र प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे छात्रों को ग्रामीण समुदायों के बीच कार्य करते हुए व्यावहारिक एवं इमर्सिव प्रशिक्षण का अवसर प्राप्त होगा। वर्चुअल माध्यम से जुड़े व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन, यूएसए के भारतीय सदस्यों श्री मयंक गांधी, किशन गोयंका एवं प्रसाद मोदक ने अपने विचार प्रस्तुत किए और पंतनगर यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर कार्य करने के अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त की।
आईआईटी एलुमनाई द्वारा स्थापित व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन जल, स्वास्थ्य, ऊर्जा, शिक्षा, आजीविका एवं स्थिरता जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण समुदायों के लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित एवं लागू करने की दिशा में कार्य करती है।समझौते के तहत विश्वविद्यालय की शोध एवं नवाचार क्षमता को व्हील्स के एनजीओ एवं एलुमनाई नेटवर्क के साथ जोड़कर इनोवेशन से पायलट, पायलट से बाजार और बाजार से बड़े स्तर पर तैनाती (स्केल-अप) तक सहयोगी तंत्र विकसित किया जाएगा। दोनों संस्थाओं के बीच विकास एवं तैनाती से जुड़े समूहों के बीच द्वि-दिशात्मक सूचना एवं ज्ञान का आदान-प्रदान भी किया जाएगा।
व्हील्स द्वारा अपने नेटवर्क के माध्यम से पायलट परियोजनाओं, फील्ड कार्य, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, छात्र इंटर्नशिप तथा संभावित फंडिंग में सहयोग किया जाएगा। वहीं विश्वविद्यालय ग्रामीण भारत की आवश्यकताओं से जुड़े नवाचारों की पहचान एवं समीक्षा, पायलट कार्यान्वयन में सहयोग तथा प्राथमिकता वाले शोध क्षेत्रों के लिए संयुक्त योजना तैयार करेगा। समझौता तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा तथा निर्धारित प्रावधानों के अनुसार इसका वार्षिक नवीनीकरण किया जाएगा। कार्यक्रम में निदेशक संचार, विभिन्न शोध केंद्रों के संयुक्त निदेशक, विश्वविद्यालय की प्लानिंग टीम के वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।





