देवभूमि द्वार पर फिर ‘क्रेडिट वार’! महापौर-विधायक दोनों ने बताया अपनी पहल का नतीजा, जनता पूछ रही—काम कब होगा?
रुद्रपुर। (लोक निर्णय)उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत वाले ‘देवभूमि प्रवेश द्वार’ की डीपीआर स्वीकृत होने के बाद रुद्रपुर में विकास कार्य से अधिक उसके श्रेय को लेकर सियासत गर्म हो गई है। एक ही दिन भाजपा के दो प्रमुख नेताओं—रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा ने आज सिटी क्लब में प्रेस आयोजित कर इस उपलब्धि को अपने प्रयासों का परिणाम बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया। इसके बाद महापौर विकास शर्मा ने खबर और डीडीए को भेजे पत्र को नगर निगम ग्रुप में डालकर इसका श्रेय लेने की बात कही है।इससे एक बार फिर शहर में ‘क्रेडिट वार’ की चर्चा शुरू हो गई है।विधायक शिव अरोरा ने कहा कि उनके लगातार प्रयासों और मुख्यमंत्री से किए गए आग्रह के चलते देवभूमि द्वार की स्वीकृति मिली है। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री की विकासोन्मुख सोच का परिणाम बताते हुए उनका आभार जताया।इसके कुछ ही समय बाद महापौर विकास शर्मा ने विस्तृत बयान जारी कर कहा कि नगर निगम ने काफी पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रस्ताव शासन को भेजा था और समय-समय पर लगातार उसका अनुश्रवण किया गया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात में भी यह विषय उठाया गया था। इसके बाद शासन और जिला विकास प्राधिकरण स्तर पर लगातार पत्राचार किया गया तथा 23 मई 2026 को भी प्रस्ताव को शीघ्र आगे बढ़ाने के लिए पत्र भेजा गया। अब डीपीआर स्वीकृत होने से परियोजना के जल्द धरातल पर उतरने का रास्ता साफ हुआ है।महापौर ने कहा कि प्रस्तावित भव्य प्रवेश द्वार देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक होगा तथा प्रदेश में प्रवेश करने वाले पर्यटकों और आगंतुकों का स्वागत करेगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम रुद्रपुर को उसकी सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप विकसित करने के लिए त्रिशूल चौक, शिव कॉरिडोर, डमरू चौक और श्रीराम पार्क जैसी परियोजनाओं पर भी कार्य कर रहा है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले भी रुद्रपुर ड्रेनेज प्लान को मिली सैद्धांतिक सहमति को लेकर विधायक और महापौर के बीच श्रेय लेने की होड़ चर्चा का विषय बनी थी। अब देवभूमि द्वार की स्वीकृति पर भी दोनों नेताओं के अलग-अलग दावों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
हालांकि शहर की जनता की प्राथमिकता कुछ और है। लोगों का कहना है कि विकास योजनाओं का श्रेय किसे मिले, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि परियोजनाओं का निर्माण कार्य आखिर कब शुरू होगा और कब पूरा होगा, ताकि शहर को उनका वास्तविक लाभ मिल सके। फिलहाल देवभूमि द्वार की डीपीआर स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन अब सबकी निगाहें निर्माण कार्य शुरू होने की तारीख पर टिकी हैं।





