ऊधम सिंह नगर खेती/किसानी स्वास्थ्य

गाजर घास से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी दी गई

पंतनगर। (लोक निर्णय) गाजर घास जागरूकता सप्ताह के पाचवें दिन जागरूकता कार्यक्रम एवं एक विशेष अनुसूचित जाति वर्ग के लिए खरपतवार प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम चोपड़ा दांगड़ जोलीकोट, नैनीताल में परियोजनाधिकारी डा. एसपी. सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से गाजर घास के मानव स्वास्थ्य, पशुओं और कृषि फसलों पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही ग्रामीणों एवं किसानों को गाजर घास के दुष्प्रभावों तथा इसके प्रभावी नियंत्रण के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि गाजर घास केवल फसलों की उत्पादकता को प्रभावित नहीं करती, बल्कि मनुष्यों एवं पशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए समय-समय पर इसकी पहचान कर इसे जड़ सहित उखाड़ना तथा उचित तरीके से नष्ट करना आवश्यक है।किसानों को गाजर घास के जैविक एवं रासायनिक नियंत्रण की विभिन्न विधियों की जानकारी दी गई। साथ ही खेतों, सड़क किनारे, खाली भूमि एवं सार्वजनिक स्थानों पर नियमित निगरानी रखने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की गई कि वे सामूहिक रूप से अभियान चलाकर गाजर घास को नियंत्रित करें और अपने आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ एवं खरतवार मुक्त रखने में सहयोग दें। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बीना जीना, ग्राम प्रधान एवं क्षेत्र के आसपास के कई किसान ने भाग लिया। डा. एसपी. सिंह द्वारा अनुसूचित जाति के किसानों के लिये एक दिवसीय खरपतवार प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने किसानों को फसलों में होने वाले खरपतवारों को नियंत्रित करने के आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया एवं किसानों को रसायनों के सही इस्तेमाल के साथ-साथ आधुनिक कृषि यंत्रों द्वारा खरपतवार हटाने की तकनीक बतायी गई। सही समय पर खरपतवार प्रबंधन करने से फसल की लागत में कमी आती है और गुणवत्तापूर्ण पैदावार में बढ़ोतरी होती है। प्रगातिशील किसान द्वारा मडुआ, मिर्च और प्याज की फसलों में समस्या बतायी गयी। डा. सिंह ने मडुआ, रागी की फसल में खरपतवार व रोगों के प्रबंधन और मिर्च तथा प्याज की नर्सरी पौध में लगने वाले सड़न रोग से बचाव के लिए जरूरी तकनीकी जानकारी साझा की। मडुआ की फसल को खरपतवारों और बीमारियों से बचाने के लिए सही समय पर दवा के इस्तेमाल की सलाह दी है जैसे बुआई के तुरंत बाद 1 से 2 दिन के भीतर एवं बुआई के बाद यदि फसल उगने के 15-20 दिन बाद चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार दिखें, तो खरपतवारों को उगने से रोकने के लिए शाकनाशी छिड़काव करें। कृषि विशेषज्ञ की सलाह अनुसार अनुशंसित खरपतवारनाशी का सही मात्रा में छिड़काव करें। मडुआ में ब्लास्ट झुलसा रोग से बचाव के लिए लक्षण दिखते ही दवाई छिड़कें। मिर्च और प्याज के पौधों का ऊपर व नीचे से सूखकर सड़ना मुख्य रूप से आर्द्र पतन या फफूंद जनित सड़ांध के कारण होता है। खेत में पानी न रुकने दें और जरूरत से ज्यादा सिंचाई से बचें।कार्यक्रम के अंत में भाग लेने वाले सभी अनुसूचित जाति के लाभार्थी किसानों को खरपतवार प्रबंधन से सम्बन्धित लीफलेट भी वितरित किए गए।

locnirnay@gmail.com

locnirnay@gmail.com

About Author

You may also like

ऊधम सिंह नगर

यूएस नगर में शपथ नहीं ले पाए 99 ग्राम प्रधान, मायूस

लोक निर्णय,रुद्रपुर: त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कड़े मुकाबले में प्रधान तो चुने गए, मगर कोरम पूरा न होने पर 99
ऊधम सिंह नगर

जिला जल एवं स्वच्छता मिशन बैठक – पेयजल के लिए 636.14 करोड़ स्वीकृत

लोक निर्णय,रुद्रपुर: पूर्व केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री व सांसद अजय भट्ट ने चार सितंबर को कलक्ट्रेट के सभागार