गर्भवती की मौत,तीन माह के भ्रूण को इंसाफ दिलाने की जांच
रुद्रपुर। इलाज के दौरान गर्भवती की मौत के मामले में अब नया मोड आ गया है।अब मां के गर्भ में पल पल रहे भ्रूण को इंसाफ दिलाने के लिए जांच होगी।शहर के कारोबारी बलराम अग्रवाल ने प्राथमिकी पंजीकृत कराते हुए कहा है कि 22 अप्रैल 2023 को उनकी इकलौती बेटी ज्योति का विवाह प्रतापपुर नानकमता निवासी दीपांशु मितल के साथ हुआ था। शादी के कुछ माह बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग एक करोड़ रुपये और फाच्र्युनर कार मांगने लगे।इसके लिए बेटी पर दबाव बनाते थे।उनकी पुत्री ने एक बेटी को जन्म दिया।जब बेटी दूसरी बार गर्भवती हुई तो ससुराल पक्ष ने लिंग परीक्षण कराया। दोबारा बेटी होने की भनक लगते ही गर्भपात करवा दिया।जिससे ज्योति की हालत बिगड़ने लगी और 11 जुलाई को नोएडा में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि लिंग परीक्षण रुद्रपुर में या नोएडा में हुआ होगा। बेटी की ननद खुद डॉक्टर है। ज्योति तीन माह की गर्भवती थी। ऐसे में दहेज हत्या में बेटी के अलावा तीन माह का भ्रूण भी शिकार हुआ है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब लिंग परीक्षण कर गर्भपात कराना गलत है तो ऐसे में लिंग परीक्षण कर गर्भपात किसने किया।क्या डॉक्टर को कानून की जानकारी नहीं रही। अब इस मामले की जांच सीओ सदर करेंगे। क्योंकि इससे नीचे के अधिकारी इस तरह के मामले की जांच नहीं कर सकते हैं। जांच में लिंग परीक्षण कर गर्भपात करने वाले और कराने वाले बेनकाब होंगे।साथ ही नियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।चर्चा है कि शायद इस तरह का पहला ऐसा मामला है कि महिला की मौत के बाद लिंग परीक्षण कर तीन माह के भ्रूण का गर्भपात के मामले की जांच हो रही है।सीओ सदर प्रशांत कुमार ने बताया कि दहेज हत्या हो या फिर लिंग परीक्षण की भ्रूण की हत्या एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इस मामले की जांच की जा रही है।





