किसी नगर निगम में नहीं हुईं बोर्ड की छह बैठकें
काशीपुर। नगर निगम अधिनियम के अनुसार नगर निगमों की वास्तविक सत्ता पार्षदों में निहित है।इन पार्षद द्वारा सामूहिक रूप से नगर निगम की बैठकों के माध्यम से इन्हें चलाने का प्रावधान अधिनियम में हैं, परन्तु कुमाऊं के सभी पांचों नगर निगमों में नियमों के अनुसार वर्ष में न्यूनतम 6 तथा प्रत्येक दो माह की अवधि में नगर निगम बैठकों का आयोजन ही नहीं हो पा रहा हैं। यह सनसनीखेज खुलासा सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) को कुमाऊं के सभी नगर निगमों द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना से हुआ।
काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने कुमाऊं के सभी नगर निगमों के लोक सूचना अधिकारियों से एक जनवरी 2025 से सूचना उपलब्ध कराने की तिथि तक हुई नगर निगम/बोर्ड बैठकों की सूचना उनके कार्यवृत्त की प्रति सहित चाही थी। कुमाऊं के सभी नगर निगमों के लोक सूचना अधिकारियों ने अपने-अपने नगर निगम की बोर्ड बैठकों के कार्यवृृत्तों की प्रतियां उपलब्ध करायी हैं।काशीपुर नगर निगम की ओर से उपलब्ध करायी गयी सूचना के अनुसार 2025 में केवल दो निगम बोर्ड बैठकें पांच फरवरी तथा तीन मार्च को हुई।पांच फरवरी की मेयर दीपक बाली की अध्यक्षता में हुई प्रथम बैठक में 40 पार्षद उपस्थित थे । इसमें तीन प्रस्ताव पारित हुए थे। तीन मार्च को हुई दूसरी बैठक में 39 पार्षद उपस्थित थे 24 प्रस्ताव पारित किए गए थे।नगर निगम रुद्रपुर से उपलब्ध करायी सूचना के अनुसार बोर्ड की तीन बैठकें हुईं । मेयर विकास शर्मा की अध्यक्षता में सात फरवरी की बैठक में मेयर, पदेन सदस्य के रूप में विधायक रुद्रपुर शिव अरोरा तथा विधायक किच्छा तिलक राज बेहड़ तथा 40 पार्षद उपस्थित थे। इसमें केवल 1 प्रस्ताव पारित किया गया। 18 फरवरी की बैठक में 39 पार्षद उपस्थित थे।जिसमें एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया।नगर निगम हल्द्वानी काठगोदाम की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना के मुताबिक 26 मार्च को महापौर गजराज बिष्ट की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें 56 पार्षद उपस्थित थे तथा 11 विशेष प्रस्ताव पारित किए गए थे।नगर निगम अल्मोड़ा की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार सात फरवरी, 2025, 29 अप्रैल पांच अगस्त को बैठक हुई। महापौर अजय वर्मा की अध्यक्षता तथा 40 पार्षदों की उपस्थिति में सात फरवरी को हुई बोर्ड बैठक में 44 प्रस्ताव पारित किए गए। 29 अप्रैल की बैठक में 63 प्रस्ताव और पांच अगस्त को हुई बैठक में 43 प्रस्ताव पारित किए गए।नगर निगम पिथौरागढ़ की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार पांच बोर्ड बैठकें हुईं।मेयर कल्पना देवाल की अध्यक्षता में छह फरवरी को हुई बैठक में पांच प्रस्ताव, 22 फरवरी की बैठक में तीन प्रस्ताव, 10 मार्च को हुई बैठक में 17 प्रस्ताव,21 अप्रैल को हुई बैठक में नौ प्रस्ताव और तीन सितम्बर को हुई बैठक में नौ प्रस्ताव पारित किए गए। नदीम उद्दीन ने बताया कि नगर निगम अधिनियम की धारा 88 के अनुसार निगम के प्रतिवर्ष कम से कम छह अधिवेशन होंगे और आगामी अधिवेशन की प्रथम बैठक का अंतर दो माह से अधिक नहीं होगा। महापौर जब उचित समझे निगम का अधिवेशन बुला सकता हैं। निगम के कुल सदस्यों के छठे भाग या अधिक द्वारा लिखित प्रार्थना पर अधिवेशन अवश्य बुलाया जाएगा। धारा 88 के अनुसार निगम का प्रत्येक अधिवेशन/बैठकें जनता के लिए सामान्यता खुला रहेगा। धारा 91 में स्पष्ट किया गया हैं कि अधिवेशन के लिये अधिवेशनों में सम्पादित किये जाने वाले सभी कार्यों सहित इसकी लिखित सूचना प्रत्येक सदस्य (पार्षद) के पते पर अधिवेशन से कम से कम 96 घंटे (4 दिन) पूर्व दी जाएगी। यदि पार्षद/सदस्य कोई प्रस्ताव लाना चाहता हैं तो वह इसकी प्रतिलिपि तथा इसकी सूचना नगर आयुक्त को 48 घंटे पहले भेजेगा। धारा 92 के अनुसार निगम के अधिवेशन में बहुमत से निर्णय होगा। धारा 98 के अनुसार निगम के प्रत्येक पार्षद को अधिनियम को लागू करने तथा नगर निगम से जुड़े किसी भी विषय पर प्रश्न पूछने का अधिकार है।




