रिप ने सोनिया को दिखाई आत्मनिर्भरता की चमकदार राह
रुद्रपुर।(लोक निर्णय)उधम सिंह नगर के गदरपुर विकासखंड स्थित ग्राम आनंदखेड़ा की रहने वाली सोनिया मांझी, पति अविनाश मांझी, कभी एक गृहिणी के रूप में परिवार की जिम्मेदारियां निभाती थीं। आर्थिक अवसर सीमित थे और अपनी आय का कोई नियमित साधन नहीं था। लेकिन आत्मनिर्भर बनने की इच्छा और सही मार्गदर्शन ने उनके जीवन में एक नई दिशा दिखाई।सोनिया मांझी सरस्वती स्वयं सहायता समूह, जिसका गठन 1 मार्च 2022 को हुआ था, से जुड़ीं। शाहकार सीएलएफ के सहयोग से उन्होंने अपनी क्षमता को उद्यम में बदलने का निर्णय लिया। इसी क्रम में IFAD-वित्तपोषित ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के अंतर्गत उन्हें गैर-कृषि आधारित व्यक्तिगत उद्यम के रूप में CSC सेंटर स्थापित करने का अवसर मिला। गतिविधि की शुरुआत 26 अगस्त 2025 को हुई।
परियोजना के तहत कुल 1 लाख रुपये की गतिविधि योजना तैयार की गई। इसमें सोनिया मांझी का 20,000 स्वयं का अंशदान, 30,000 रुपये परियोजना सहायता तथा 50,000 रुपये बैंक ऋण शामिल था। इस वित्तीय सहयोग ने उनके लिए अपना उद्यम स्थापित करने का रास्ता आसान किया।CSC सेंटर के माध्यम से सोनिया मांझी अब ग्रामीण क्षेत्र में विभिन्न आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। परियोजना द्वारा उन्हें उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की ओर से ऑनलाइन लेन-देन के लिए डिवाइस भी उपलब्ध कराया गया, जिससे उनकी सेवाओं का दायरा बढ़ा और नियमित आय में वृद्धि हुई।गतिविधि से अब तक उन्हें 63,000 की आय प्राप्त हुई है। इस दौरान कुल ₹18,000 व्यय के बाद उनका 45,000 लाभ रहा। वर्तमान में उनकी मासिक आय लगभग 6,000–7,000 रुपये है और वे बचत भी कर पा रही हैं।आज सोनिया मांझी की कहानी केवल एक महिला के उद्यमी बनने की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका सृजन, महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल है। नियमित आय ने उन्हें परिवार की आवश्यकताओं और खर्चों को आसानी से पूरा करने तथा भविष्य के लिए बचत करने में सक्षम बनाया है।ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना ने यह साबित किया है कि जब ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सहयोग, उद्यम का अवसर और आवश्यक संसाधन मिलते हैं, तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि अपने गांव में सेवा और रोजगार की नई संभावनाएं भी पैदा कर सकती हैं। सोनिया मांझी का सफर उन सभी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को आत्मनिर्भरता में बदलना चाहती हैं।





