पंत विवि में पढ़ाई के साथ उद्यमिता का पाठ, विद्यार्थी सीखेंगे उद्योग खड़ा करने से मार्केट तक का हुनर
पंतनगर। (लोक निर्णय) गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अब विद्यार्थियों को सिर्फ डिग्री और नौकरी तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि विवि की नई पहल का लक्ष्य विद्यार्थियों को अपने विषय का विशेषज्ञ बनने के साथ उद्यमी बनाना है। इसके लिए विश्वविद्यालय के सभी विषयों में देश_विदेश के उद्योग जगत से जुड़े उद्यमियों और विशेषज्ञों को विद्यार्थियों से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। जो जल्द धरातल पर दिखेंगी। देश-विदेश में विभिन्न उद्योगों में अपनी पहचान बना चुके उद्यमियों के साथ ही पंत विवि के करीब उन दो सौ पुरातन छात्रों की सूची तैयार की गई है, जो आज अलग-अलग उद्योग संस्थानों से जुड़े हुए हैं। इन विशेषज्ञों के अनुभव और ज्ञान का लाभ अब विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को सीधे मिल सकेगा। योजना के तहत हार्टिकल्चर, फ्लोरीकल्चर समेत विभिन्न विषयों में संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा। ये विशेषज्ञ विद्यार्थियों को ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन चार-चार व्याख्यान देंगे। व्याख्यान केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि विद्यार्थियों को उद्योग की वास्तविक जरूरतों, बाजार, व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया और क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से भी परिचित कराया जाएगा। विद्यार्थियों को उद्योग लगाने से लेकर कच्चा मॉल की उपलब्धता,उत्पादन,मशीनरी, मार्केट चेन आदि की जानकारियां दी जाएंगी। विवि के कुलपति डॉक्टर शिवेंद्र कुमार कश्यप की सोच यह है कि विद्यार्थी पढ़ाई पूरी करने के बाद सिर्फ नौकरी की तलाश न करें, बल्कि अपने विषय से जुड़ा स्वयं का उद्यम खड़ा करने की क्षमता भी विकसित करें। बागवानी, पुष्प उत्पादन आदि से जुड़े विद्यार्थी आगे चलकर उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन अथवा अन्य संबद्ध क्षेत्रों में अपना व्यवसाय खड़ा कर सकें।
पंत विवि के पुरातन छात्रों को इस पूरी पहल में विशेष रूप से जोड़ा जा रहा है। विश्वविद्यालय से पढ़कर उद्योग जगत में स्थापित हो चुके पूर्व विद्यार्थी वर्तमान विद्यार्थियों के सामने अपने अनुभव रखेंगे। इससे छात्रों को यह समझने में मदद मिलेगी कि विश्वविद्यालय में हासिल ज्ञान को व्यावहारिक रूप से उद्योग और व्यवसाय में कैसे बदला जा सकता है।
देश-विदेश में कार्यरत उद्यमियों और पुरातन छात्रों के जुड़ने से विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र की बदलती जरूरतों और उद्योग की अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलेगा। इससे विश्वविद्यालय और उद्योग के बीच संपर्क भी मजबूत होगा।
विश्वविद्यालय की इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विद्यार्थियों में उद्यमिता की सोच विकसित करना है। पढ़ाई के दौरान ही यदि उन्हें अनुभवी उद्यमियों का मार्गदर्शन और उद्योग की वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी मिलेगी तो वे अपने विषय में नए अवसर तलाश सकेंगे।इससे विद्यार्थियों के सामने करियर के विकल्प भी व्यापक होंगे। वे नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्योग स्थापना की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। एक विद्यार्थी का उद्यम खड़ा होना उसके लिए रोजगार का माध्यम बनने के साथ अन्य युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।विश्वविद्यालय में इस पहल को कुलपति की सकारात्मक और भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई सोच के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षा को उद्योग और उद्यमिता से जोड़ने की यह कवायद विद्यार्थियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है। साथ ही किसानों को भी उनके उत्पादों का वाजिब दाम मिल सकेगा।जिससे किसानों की आय में इजाफा होगा तो खेती के प्रति उनका रुझान और तेजी से बढ़ेगा।पंत विवि से निकलने वाले विद्यार्थी यदि अपने विषय में विशेषज्ञता के साथ उद्योग खड़ा करने की क्षमता भी हासिल करते हैं तो इसका लाभ केवल विश्वविद्यालय या विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि, बागवानी, फ्लोरीकल्चर और इससे जुड़े क्षेत्रों में नए उद्यम खड़े होने से रोजगार सृजन, उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।
विश्वविद्यालय की यह योजना जल्द ही धरातल पर दिखाई देने की उम्मीद है। इसके अमल में आने के बाद पंत विवि की कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थी किताबों के साथ-साथ उद्योग जगत के अनुभवों से भी सीखेंगे और नौकरी मांगने के बजाय रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे।





