डॉक्टरों की ‘ट्रांसफर सर्जरी’ से हिली स्वास्थ्य व्यवस्था, उत्तराखंड में 300 तबादलों के बाद अस्पतालों पर बढ़ी चिंता
रुद्रपुर। (लोक निर्णय)उत्तराखंड सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (PMS), मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) सहित करीब 300 डॉक्टरों का स्थानांतरण कर दिया है।यह ट्रांसफर सूची सोमवार रात जारी की गई। इस बड़े फेरबदल से पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। कई अस्पतालों में नए डॉक्टरों की तैनाती होगी, जबकि पुराने डॉक्टरों के कार्यमुक्त होने और नए डॉक्टरों के कार्यभार संभालने के बीच स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। चिकित्सक भी समझ नहीं पा रहे हैं कि वैसे भी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है और एक साथ काफी चिकित्सकों को ट्रांसफर कर दिया गया है।जवाहर लाल नेहरू जिला अस्पताल को पंडित राम सुमेर शुक्ला राजकीय मेडिकल कालेज में मर्ज कर दिया गया है।इस कालेज पर ऊधम सिंह नगर सहित उत्तर प्रदेश के लगे जिलों के मरीजों का बोझ बना रहता है।
ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर जिला अस्पताल से भी नौ डॉक्टरों का तबादला हुआ है। एक साथ इतने डॉक्टरों के स्थानांतरण से अस्पताल की व्यवस्थाओं पर असर पड़ने की संभावना है। मरीजों और उनके परिजनों को आशंका है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी होने पर इलाज और जांच सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग पहले से ही कई अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर तबादलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि नई तैनाती और कार्यभार संभालने की प्रक्रिया पूरी होने तक स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता कैसे बनी रहेगी।
इस बीच सरकार अगले महीने राज्यभर में स्वास्थ्य से जुड़े विशेष अभियान शुरू करने की तैयारी में है। ऐसे समय में बड़े पैमाने पर हुए तबादलों का असर इन अभियानों की गति और प्रभावशीलता पर भी पड़ सकता है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि तबादलों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
फिलहाल, अस्पतालों में डॉक्टरों के स्थानांतरण के बाद मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच नई व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा और चिंता का माहौल बना हुआ है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि कहीं इस फेरबदल का असर आम मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर न पड़े। चिकित्सक दबी जुबान से बोल रहे हैं कि इतने बड़े स्तर पर ट्रांसफर नहीं किया जाना चाहिए।इससे मरीजों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।





