तिब्बती भाषा, संस्कृति और विरासत के संरक्षण पर दिया गया जोर
देहरादून।(लोक निर्णय)तिब्बती राष्ट्रीय पहचान संरक्षण सप्ताह के अवसर पर देहरादून तिब्बती सेटलमेंट कार्यालय और तिब्बती समुदाय, देहरादून की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य तिब्बती भाषा, संस्कृति, धर्म, विरासत और विशिष्ट राष्ट्रीय पहचान के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।केंद्रीय तिब्बती प्रशासन द्वारा सितंबर के चौथे सप्ताह को ‘तिब्बती राष्ट्रीय पहचान संरक्षण सप्ताह’ के रूप में मनाने की घोषणा की गई है। इस पहल की शुरुआत 23 सितंबर 2026 से की गई है। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य तिब्बती लोगों की विशिष्ट भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित एवं मजबूत करना है।प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजकों ने चीन के ‘जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाले कानून’ को लेकर चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, यह कानून तिब्बती सहित अन्य जातीय समुदायों की विशिष्ट भाषा, संस्कृति, धर्म और पहचान के संरक्षण के लिए चुनौती उत्पन्न कर सकता है।आयोजकों ने कहा कि यह कानून 12 मार्च 2026 को अपनाया गया और 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हुआ। उन्होंने संबंधित नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ध्यान देने की अपील की।कार्यक्रम के दौरान तिब्बती समुदाय के प्रतिनिधियों ने तिब्बती भाषा, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सरकारों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तिब्बती समुदाय से जुड़े सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक अधिकारों के मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की।आयोजकों ने तिब्बती कार्यकर्ता लोबगा रंगज़ेन की मृत्यु का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, रंगज़ेन की 2 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आत्मदाह के बाद मृत्यु हुई थी।प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजकों ने सिनो-तिब्बत मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए सार्थक और परस्पर सम्मानजनक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सरकारों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संबंधित मुद्दों पर संवाद तथा शांतिपूर्ण प्रयासों को आगे बढ़ाने की अपील की।आयोजकों ने कहा कि तिब्बती संस्कृति और पहचान के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने तिब्बती समुदाय की भाषा, संस्कृति और विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जाने पर बल दिया।





