शहीदों की करो पूजा,यह हिंदुस्तान ने बोला है…पर झूमे लोग
काशीपुर। (लोक निर्णय) साहित्य दर्पण की मासिक काव्य संध्या का आयोजन कैलाश जोशी पर्वत के सौजन्य से एक कंपनी में हुआ। अध्यक्षता वीरेन्द्र कुमार मिश्रा तथा संचालन प्रतोष मिश्रा ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र का अनावरण माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित के साथ सोमपाल प्रजापति ने मां सरस्वती की वंदना मधुर स्वर में प्रस्तुत की। काव्य संध्या के आयोजन में कवियों ने अपनी सर्वश्रेष्ठ रचना प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। कवि जितेंद्र कुमार कटियार- देश एक है खून एक है, पर एहसास दिलों का जुदा- जुदा, मंजिल सबकी एक वही है, पर रास्ता सबका जुदा- जुदा। कवि कैलाश चंद्र यादव-मेरा दिल ये बोले, वतन मेरा आजाद रहे, चमन मेरा आबाद रहे, धरती सोना उगले मेरी, हीरो की बरसात रहे । कवि सुभाष चंद्र अग्रवाल सी.ए.- आज की कविता कोने में खड़ी रो रही है। कवि सुरेंद्र भारद्वाज-सलाह व नसीहत सब देते हैं, साथ कोई नहीं देता, उंगलियां सब उठाते हैं हाथ कोई नहीं देता । कवि कुमार विवेक मानस- भूल कर ग़म जरा मुस्कुराया करो, टूटे दिल को ग़जल भी सुनाया करो। कवि डॉ. प्रदोष मिश्रा- बुजुर्गों का हम पर जो साया ना होता, कहीं कुछ भी हमने तो पाया ना होता। कवि ओइम शरण आर्य चंचल- दिल फटा अपना सहज सीने नहीं देती, जिंदगी का रस माधुर पीने नहीं देती।कवि कैलाश जोशी पर्वत- हिंदी भाषा है सरल, इसमें प्रेम अपार, सबको अपना ले बना खोले दिल के द्वार।कवि वी. के. मिश्रा- आज दिल बेचैन है तेरे लिए, शहनाई भी मौन है तेरे लिए। कवि सोमपाल सिंह प्रजापति सोम- आवश्यकता जब पड़ी तो तलवार बनी है, कश्ती फंसी भंवर में तो पतवार बनी है। कवि विजय प्रकाश कुशवाहा- मेरी हिंदी तेरा कैसे वंदन लिखूं, तुझको लिखूं धारा या गगन मैं लिखूं। कवि शेष कुमार सितारा- आंगन में दीवारें खिंचना कैसा लगता है, कवि शुभम लोहनी- शहीदों की करो पूजा, यह हिंदुस्तान बोला है। कवि सतपाल शर्मा आकाश- मेरे ख्वाबों में है हिंदी, मेरे भावों में है हिंदी। कवि अनुराज चौधरी – रहें गरीब या हो जाए फकीर बेईमान हमारा नाम ना हो। कवि नवीन बिष्ट- जय, जय, जय, जय सर्व देव वंदना। कवि भागीरथ शर्मा- जमी भेज देंगे, जहां बेच देंगे, यह मुर्दों के सिर का कफन बेंच देंगे, कलम के सिपाही अगर चुप रहे तो, वतन के यह नेता वतन बेंच देंगे। कवि पुष्पेंद्र कुमार- वो चाय रखी है टेबल पर, इतवार पुराने ले आओ, हम कह देंगे कल छुट्टी है, यार पुराने ले आओ। कवित्री प्राची तिवारी-राष्ट्रगीत सुनाया। कवि सम्मेलन के मुख्यमंत्री हरेंद्र कुमार शर्मा ने सभी कवियों की भूरि भूरि प्रशंसा की। इस मौके पर प्रवीन रावत, आयुष भारद्वाज, अशोक रावत, अमन गुप्ता, पुनीत चंद्र, मनीष तिवारी, घनश्याम आर्य, अतुल आर्य, सुधीर कुमार कंबोज, हेमंत कुमार गुप्ता, शिवदासी तिवारी, भागीरथ शर्मा आदि उपस्थित रहे । महा मंत्री साहित्य दर्पण।





