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बालको के इंजीनियर: नवाचार, तकनीक और दक्षता से गढ़ रहे एल्यूमिनियम निर्माण का भविष्य

बालकोनगर। छत्तीसगढ़। हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे से सवाल से होती है, क्या इसे और बेहतर किया जा सकता है? और इस सवाल का जवाब तलाशते हैं वे इंजीनियर, जो हर दिन बालको के संयंत्र में प्रक्रियाओं, तकनीक और आंकड़ों के बीच नए समाधान खोज रहे हैं। एल्यूमिनियम निर्माण सिर्फ धातु को आकार देने की प्रक्रिया नहीं है। यह कई चरणों, तकनीकों और विशेषज्ञताओं से जुड़ी एक ऐसी यात्रा है, जहाँ एक छोटे से सुधार का असर पूरी प्रक्रिया पर दिखाई दे सकता है। सुरक्षा को बेहतर बनाना हो, गुणवत्ता में निरंतरता लानी हो, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना हो या तकनीक की मदद से निर्णय लेने के नए तरीके तलाशने हों, बालको के इंजीनियर हर स्तर पर इस बदलाव का हिस्सा हैं।

भारत सरकार के अंतर्गत पीआइबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल के नेतृत्व में 13 सदस्यीय पत्रकारों का दल 16 सितंबर को बालको का भ्रमण किया।इस दौरान अधिकारियों से बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि बालको जब एक मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) एल्यूमिनियम उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब यह यात्रा केवल क्षमता बढ़ाने की नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं को और मजबूत, स्मार्ट और टिकाऊ बनाने की भी है। इस यात्रा में इंजीनियर अपने तकनीकी ज्ञान, अनुभव और समस्या समाधान की सोच के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसे उच्च क्षमता वाले संयंत्र में काम करना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। यहां हर प्रक्रिया का अपना महत्व है और हर निर्णय उत्पादन की निरंतरता से जुड़ा होता है।पॉटलाइन संचालन से जुड़ी प्रियंका साहू बताती हैं कि वह उन युवा इंजीनियर्स में से एक हैं, जिन्हें बालको की 525 किलोएम्पियर पॉटलाइन जैसी भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक के साथ काम करने का अवसर मिल रहा है। यहां प्रक्रियाएँ जितनी बड़ी हैं, सीखने और नवाचार के अवसर भी उतने ही बड़े हैं। किसी छोटे से बदलाव का भी उत्पादन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है और हम हर दिन ऐसे छोटे-छोटे सुधारों को आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।बालको की डिजिटल टीम से जुड़े नवप्रीत सिंह घई बताते हैं कि एक संयंत्र में प्रक्रियाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में जानकारी तैयार होती है। हमारी भूमिका इस जानकारी को उन लोगों के लिए उपयोगी बनाना है, जो इन प्रक्रियाओं का संचालन करते हैं। एआइ और डेटा आधारित तकनीकों की मदद से हम पैटर्न पहचान सकते हैं, संचालन में होने वाले बदलावों को समझ सकते हैं और अधिक स्पष्टता के साथ निर्णय ले सकते हैं। इससे हमें प्रक्रियाओं को एक अलग दृष्टिकोण से देखने में मदद मिलती है और कई बार हम किसी छोटे बदलाव के बड़ी चुनौती बनने से पहले ही उस पर कार्रवाई कर पाते हैं।एल्यूमिनियम निर्माण में निरंतरता का सीधा संबंध उत्पाद की गुणवत्ता से है। प्रक्रिया एवं गुणवत्ता नियंत्रण टीम से जुड़े अज्लान शरीफ बताते हैं कि “जब आप किसी प्रक्रिया के साथ रोज काम करते हैं, तो उसमें होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को पहचानना शुरू कर देते हैं। हम आंकड़ों का अध्ययन करते हैं, उन्हें कार्यस्थल पर दिखाई देने वाली स्थिति से मिलाते हैं और यह समझने का प्रयास करते हैं कि बदलाव क्यों आया। कई बार किसी समस्या का समाधान प्रक्रिया के सही बिंदु पर किए गए एक छोटे से सुधार में ही छिपा होता है। समय के साथ ऐसे छोटे-छोटे सुधार मिलकर पूरी प्रक्रिया के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं।”कास्टहाउस में भी इंजीनियरों की भूमिका केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में बदलने तक सीमित नहीं है। कास्टहाउस से जुड़ी आशिका सिंह कहती हैं कि हम केवल पिघले हुए एल्यूमिनियम को तैयार उत्पादों में नहीं बदलते, बल्कि संसाधनों की दक्षता और प्रक्रियाओं की टिकाऊ क्षमता को बेहतर बनाने पर भी काम करते हैं। चाहे बात ऊर्जा की हो, सामग्री के बेहतर उपयोग की हो या प्रक्रिया की दक्षता की, हर सुधार अधिक मूल्य सृजित करने के साथ हमारे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में योगदान देता है। कंपनी की पूरी एल्यूमिनियम मूल्य श्रृंखला में बालको एवं बिजनेस पार्टनर के लगभग 3000 इंजीनियर कर्मचारी अपने तकनीकी ज्ञान, डिजिटल क्षमताओं और समस्या समाधान की सोच को साथ लेकर सुरक्षा, गुणवत्ता, उत्पादकता और टिकाऊ विकास को मजबूत कर रहे हैं। इंजीनियर्स डे पर हम इन इंजीनियरों की उस महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करते हैं, जो आज के विनिर्माण को बेहतर बनाने के साथ-साथ बालको को भविष्य की आवश्यकताओं और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार कर रही है।

locnirnay@gmail.com

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