‘जन-जन की सरकार’ एवं ‘जनता मिलन’ में उठी आवाज़ पर सीमांत गांव के जरूरतमंद परिवारों तक पहुंची राहत
चम्पावत ।(लोक निर्णय) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में संचालित ‘जन-जन की सरकार’ एवं ‘जनता मिलन’ कार्यक्रम आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है । इन कार्यक्रमों के दौरान प्राप्त शिकायतों एवं आवेदनों पर जिला प्रशासन द्वारा संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, जिसका सकारात्मक प्रभाव दूरस्थ एवं सीमांत क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र की हरम ग्राम पंचायत के उन जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाई गई, जिन्होंने बरसात के दौरान मकानों की टपकती छतों से हो रही परेशानी से अवगत कराया था।जिस पर राजस्व उप निरीक्षक एवं ग्राम प्रधान की संस्तुति के उपरांत रेडक्रॉस सोसायटी चम्पावत ने प्रभावित परिवारों के घर-घर पहुँचकर बरसात से बचाव हेतु आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई।रेडक्रॉस सोसायटी चम्पावत के चेयरमैन राजेंद्र गहतोड़ी ने बताया कि बसंती देवी, केसरी देवी, लक्ष्मी देवी, अंबादत्त, अमर सिंह, माता देवी, कलावती देवी, हीरा देवी एवं प्रहलाद सिंह सहित कुल 9 परिवारों को राहत सामग्री प्रदान की गई।उन्होंने कहा कि रेडक्रॉस सोसायटी का उद्देश्य संकट की घड़ी में जरूरतमंदों तक शीघ्र सहायता पहुँचाना है, मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देते हुए रेडक्रॉस सोसायटी की टीम ने हाल ही में तेंदुए के हमले में घायल हुए 63 वर्षीय श्री सुरेश चंद्र पांडेय के घर पहुँचकर उनका कुशलक्षेम भी जाना। टीम ने उन्हें राहत सामग्री उपलब्ध कराते हुए शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की तथा भविष्य में भी हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।राहत वितरण अभियान में रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन राजेंद्र गहतोड़ी, कोषाध्यक्ष प्रेम बल्लभ भट्ट, सदस्य जनार्दन चिल्कोटी तथा आपदा प्रबंधन विभाग के कमलाकांत कापड़ी सहित ग्राम प्रधान हरम सूरज सिंह महर उपस्थित रहे।जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शासन की प्राथमिकता है कि सहायता का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचे। ‘जन-जन की सरकार’ एवं ‘जनता मिलन’ जैसे जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से प्राप्त प्रत्येक समस्या पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। सीमांत क्षेत्रों के जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाना इसी जनसेवा और संवेदनशील प्रशासन की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।





