चम्पावत में मत्स्य पालन को मिल रही नई दिशा, मत्स्य पालक आर्थिक रूप से हो रहे सशक्त
चंपावत ।(लोक निर्णय)मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में जनपद चम्पावत में मत्स्य पालन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति देखने को मिल रही है। राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से जनपद के कृषकों, युवाओं तथा मत्स्य पालकों को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने हेतु निरंतर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।जिला मत्स्य अधिकारी ने बताया कि जिला योजना, राज्य पोषित मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना और केंद्र पोषित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत मत्स्य पालकों को बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता और सब्सिडी प्रदान की जा रही है।जनपद के पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए पालीलाइनर मत्स्य तालाब निर्माण, तालाब सुधार, ट्रॉउट रेसवेज निर्माण, स्मॉल बायोफ्लॉक यूनिट, आर.ए.एस. तथा बत्तख व मुर्गी बाड़ा निर्माण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों पर सामान्य वर्ग के लिए 40 से 50 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व महिला लाभार्थियों के लिए 60 प्रतिशत तक का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।इसके साथ ही जल संरक्षण और मत्स्य बीज संचय हेतु जनजागरूकता गोष्ठियों तथा मत्स्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन एवं व्यंजन निर्माण हेतु विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे युवाओं को स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर प्राप्त हो रहे हैं।मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करने तथा ताज़ा मछलियों के विपणन को सुगम बनाने के उद्देश्य से ‘मत्स्य सहेली’ योजना, फिश क्योस्क की स्थापना और मोटर साइकिल विद आइस बॉक्स जैसी सुविधाएं अनुदान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही पंचेश्वर एवं चुका जैसे क्षेत्रों में एंग्लिंग मीट का आयोजन कर मत्स्य पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।योजनाओं का लाभ उठाने हेतु इच्छुक कृषक एवं लाभार्थी अपनी ज़मीन की खसरा-खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो एवं शपथ पत्र के साथ मत्स्य विभाग में आवेदन कर सकते हैं। प्रदेश सरकार की इन विकासपरक नीतियों से जनपद में स्वरोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं तथा स्थानीय कृषक समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं।





