दीपावली पर नवनिर्मित घाटों तक पहुंची गंगा की धारा, कुंभ की तैयारियों को मिला नया विस्तार
हरिद्वार । (लोक निर्णय) दीपावली के उल्लास के बीच हरिद्वार में गंगा की धारा ने नवनिर्मित घाटों का स्पर्श किया तो कुंभ-2027 की तैयारियों को एक नया और सुखद आयाम मिल गया। गंगा नहर की क्लोजर अवधि पूरी होने के बाद बीती रात से नहर में पानी छोड़ा जाना शुरू हो गया है। धीरे-धीरे बढ़ता जलस्तर अब उन घाटों तक पहुंच रहा है, जहां पिछले कई दिनों से दिन-रात निर्माण कार्य चल रहा था। गंगा की जलधारा के साथ इन घाटों का स्वरूप भी निखरने लगा है। आगामी कुंभ में श्रद्धालुओं को हरिद्वार में करीब 16 किलोमीटर लंबाई के पक्के और सुव्यवस्थित घाटों पर स्नान की सुविधा उपलब्ध होगी।दिव्य एवं भव्य कुंभ-2027 के आयोजन के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता तथा मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में हरिद्वार में बड़े पैमाने पर आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में कुंभ नगरी में गंगा स्नान के लिए पक्के घाटों के विकास व विस्तार की महत्वपूर्ण व चुनौतीपूर्ण मुहिम भी अब साकार हो गई है।हरिद्वार में गंगा तट पर पहले से लगभग साढ़े बारह किलोमीटर लंबाई के घाट उपलब्ध हैं। कुंभ-2027 की तैयारियों के तहत इस बार सिंचाई विभाग द्वारा गंगा नहर और एस्केप चैनल पर करीब सवा तीन किलोमीटर लंबाई के 10 नए घाटों का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त यूएआइआइडीबी की ओर से यूपीडीसीसी के माध्यम से हरकी पैड़ी के निकट शोल क्षेत्र में धनुष पुल और सीसीआर के मध्य 82 मीटर लंबा एक अन्य घाट भी बनाया जा रहा है। इस तरह पुराने घाटों के साथ नए घाटों का विस्तार कुंभ के दौरान गंगा तट पर स्नान के लिए उपलब्ध स्थान को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगा। नए घाटों का निर्माण जितना महत्वपूर्ण था, उतना ही चुनौतीपूर्ण उनका जलमग्न रहने वाला हिस्सा तैयार करना भी था। गंगा नहर में पानी का प्रवाह बंद रहने की सीमित अवधि ही ऐसे निर्माण कार्यों के लिए उपलब्ध होती है। पानी रहने पर ये हिस्से जलमग्न रहते हैं, जिससे वहां निर्माण और मरम्मत संभव नहीं हो पाती। इसी समय का पूरा उपयोग करते हुए नए घाटों के डूब क्षेत्र में निर्माण कार्य पूरा किया गया। साथ ही पुराने घाटों के जलमग्न हिस्सों की मरम्मत भी की गई। मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका के निर्देशन में निर्धारित समयसीमा को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य दिन-रात जारी रहे, ताकि नहर में पानी छोड़े जाने से पहले जरूरी काम पूरे किए जा सकें।इस दौरान अपर गंगा नहर पर पूर्व निर्मित 34 घाटों और एस्केप चैनल पर स्थित 22 पुराने घाटों के जलमग्न रहने वाले हिस्सों की मरम्मत भी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इससे नए घाटों के साथ पुराने घाटों को भी कुंभ के लिए बेहतर स्थिति में तैयार करने का रास्ता साफ हुआ है।कुंभ -2027 के पावन पर्व के लिए कुंभ नगरी हरिद्वार को सजाया-संवारा जा रहा है। दीपावली पर नवनिर्मित घाटों तक पहुंचती गंगा की धारा इस बदलते स्वरूप की सुखद झलक प्रस्तुत कर रही है। करीब 16 किलोमीटर लंबाई के पक्के घाट आगामी कुंभ में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ उनकी सुविधा, सुरक्षित स्नान और बेहतर व्यवस्थाओं का मजबूत आधार बनेंगे।





